WHO AM I
मैं
मेरी आत्मा ना जाने कँहा खोई है
तलाशता फिर रहा हु जिसे,
वह अब भी सोई है।
जिंदगी के सफ़र में अब निकल चूका हूँ,
खुद को तलाशते तलाशते
खुदी मैं खो गया हूँ।
आने वाले वक़्त के सहारे जीता हूँ
और बीती हुई यादों मैं खोया रहता हूँ ,
एक पल भी ना जी पाया
इस समय मैं ,
फिर भी ना जाने क्यों
जीना चाहता हूँ।
लगा हूँ इन सुख दुख को सुलझाने में
और खुद ही खोया हूँ
इस संसार की उलझनो में।
ना जाने मेरी आत्मा कहाँ खोई है
तलाशता फिर रहा हूँ जिसे
वह अब भी सोई है।
SUMIT KUMAR
मेरी आत्मा ना जाने कँहा खोई है
तलाशता फिर रहा हु जिसे,
वह अब भी सोई है।
जिंदगी के सफ़र में अब निकल चूका हूँ,
खुद को तलाशते तलाशते
खुदी मैं खो गया हूँ।
आने वाले वक़्त के सहारे जीता हूँ
और बीती हुई यादों मैं खोया रहता हूँ ,
एक पल भी ना जी पाया
इस समय मैं ,
फिर भी ना जाने क्यों
जीना चाहता हूँ।
लगा हूँ इन सुख दुख को सुलझाने में
और खुद ही खोया हूँ
इस संसार की उलझनो में।
ना जाने मेरी आत्मा कहाँ खोई है
तलाशता फिर रहा हूँ जिसे
वह अब भी सोई है।
SUMIT KUMAR
Outstanding👌
ReplyDeleteAwesome
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